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प्रकृति पंचभूता है, अर्थात् पंचतत्वो से, बनी है | यह समस्त ब्रह्माण्ड भी कमोबेस इन्ही तत्वों से, निर्मित है | मनुष्य पंचतत्वो की साकृति है | मानव प्रकृति की ऐसी अदभुत् रचना है, जिसका निर्माण ब्रह्माण्ड विजय के निमित्त हुआ है | पंचस-मानव की पंच-मूल आवश्यकताएं है, जिनकी पूर्ति मात्र से, प्रत्येक मनुष्य, स्वयं पंचेश्वर बन ब्रह्माण्ड सत्ता को स्थापित करेगा | परन्तु चन्द सत्ता लोलुप तुच्छ-स्वार्थ परक लोगो ने कालांतर से, अबतक मानव की आवश्यकताओं से, शतरंज के खेल की तरह खेला है, नित्य मानवता का स्खलन कर इसे ईश्वर बनाने की जगह मानव पशु में, परिवर्तित कर दिया | सम्पूर्ण विश्व में, राजतंत्र का दूसरा घृणित चेहरा, अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र के माध्यम से, विश्व अर्थ का 95% भाग अवशोषित कर, एक छोटे से, भूभाग स्विट्जरर्लैंड जिसे की, प्रत्यक्ष प्रजातंत्र प्रदान किया गया है, इसके बैंको में, काले धन के रूप में, जमा कर दिया गया है | इस प्रकार से, सत्तावादी मानवों ने, स्विट्जरर्लैंड में, काले धन का ब्लैक होल बना कर, विश्व भर के मानवों से, अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र के दृारा 95% धन शोषित कर, मानव को मानव-पशु,तथा मानव सभ्यता को माया सभ्यता में, परिवर्तित कर दिया है | माया शब्द का अर्थ भ्रम होता है, मानव निर्मित समस्त प्रसाधन मानव से, आगे है, स्वयं मनुष्य सबसे पीछे खड़ा खुद को सबसे कम कीमत पर बेचने को विवश है | मनुष्य की मात्र पांच आवश्यकताओं की अगर पूर्ति हो जाय तो, मनुष्य स्वयं पंचेश्वर बनकर ब्रह्माण्ड सत्ता का सञ्चालन करेगा | और मानव सभ्यता, जो की माया सभ्यता, में, परिवर्तित हो चुकी है, इससे निजात मिलेगी | और मानव ब्रह्माण्ड विजय की और निकल पड़ेगा |

 

मात्र 5000 रूपए अगर प्रत्येक मनुष्य को मिले तो वह अपना पोषण पूर्ण कर सकता है | क्यूंकि अधिकतम अपराध की जननी भूख है, जब तक मानव भूख पे, विजय नहीं पा लेता, तब तक समाज के हर तबके से, अपराध को नहीं मिटाया जा सकता | इस सत्य को नाकारा नहीं जा सकता | विश्व के प्रत्येक देशों में, प्रत्येक वर्ष, रक्षा बजट के नाम पर विशाल धन राशि, बारूद के नाम पर गलत खर्च किये जाते हैं | इस विध्वंशकारी बजट का एक छोटा अंश मात्र ही मानव पोषण हेतु प्रयाप्त होगा | अगर मानव सुपोषित होगा तो मानव बम बनने की जगह समाज को एक बेहतर भविष्य देगा | विश्व मानव समाज से, प्रत्येक अतिवाद का स्वयं ही अंत हो जायेगा | सकल मानव समाज मानवीय हो जायेगा | फिर किसी व्यक्ति विशेष को किसी व्यक्ति विशेष से, भयभीत होने की और किसी से, शोषित होने की आवश्यकता नहीं होगी | इससे एक भयमुक्त समाज, शोषण मुक्त समाज, की स्थापना होगी | फिर सुरक्षा के नाम पर बारूद की आवश्यकता नहीं होगी | समाज एक नई दिशा, और दशा तय करेगा | मनुष्य पूर्ण रूप से, विकसित होगा, समाज स्वतः रूप से, उन्नत होगा, और एक नए विश्व की रचना करेगा | घुटनों के बल रेंगने वाला मानव ब्रह्माण्ड की तरफ अग्रसर होगा | और समाज से, प्रत्येक तरह की विकृति दूर हो जाएगी | मनुष्य, मनुष्य से, घृणा की जगह परस्पर प्रेम करने लगेगा | क्योंकि इस धरती पर सबसे हिंसक प्राणी, शेर भी जब भूख से, पड़े होता है तो वह शिकार नहीं करता है, जिसमे विवेक नहीं होता है | और मानव जो की जन्म से, ही विवेकशील प्राणी है, वह अगर भूख से, पड़े होगा तो विध्वंशक कार्यो की जगह रचनात्मक कार्यो में, विश्वास करेगा और समाज को सही दिशा निर्देश देगा | इससे एक स्वस्थ समाज, देश और विश्व का नवनिर्माण होगा |

 

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