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वर्त्तमान, विश्व में, आज जो शासन की व्यवस्था है, वह पार्टी के माध्यम से, अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र के रूप में, विकसित है, जो की राजतंत्र का एक घिनौंना प्रारूप है | यह प्रजातंत्र का भ्रम है, प्रजातंत्र के नाम पर धोखा है | प्रजातंत्र का अर्थ होता है – प्रजा पहले बाद में तंत्र | परन्तु पार्टी-तंत्र में – मानव हित, देश हित, सर्वहित से परे पार्टी हित ही सर्वोपरी होता है | अत: प्रजातंत्र की बहाली के लिए, पार्टी-तंत्र का सम्पूर्ण रूप से निष्कासन अति आवश्यक है | एक विकसित पार्टी को एक बार चुनावी प्रक्रिया में, हजारो करोड़ रूपए की आवश्यकता होती है | जिसकी उगाही वह सरकार चलाने से, लेकर, पार्टी की चुनावी टिकट बेच कर करती है, और सत्ता की बागडोर अयोग्य लोगो के हाथो में, थमा देती है | जिसका परिणाम, यह होता है की किसी भी देश में, भुखमरी, गरीबी, अराजकता के रूप में, एक गंभीर समस्या उत्पन्न होती है, और लोगो का विश्वास उस सम्पूर्ण व्यवस्था से, उठ जाता है, और इससे देश में, अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न होती है, और मानवता हर कदम पे दम तोडती है, जिससे पूरा विश्व रूबरू है | अब प्रश्न उठता है की इस अव्यवस्था का हल क्या हो ? प्रत्यक्ष प्रजातंत्र ही इस अव्यवस्था का एक मात्र समुचित मार्ग हो सकता है, अगर समाज अपने बीच से, बगैर पार्टी के किसी भी व्यक्ति को, जो की सामाजिक व्यवस्था में, पूर्ण विश्वास रखता हो, निर्वाचित कर संसद भवन में, भेजे तभी इस लूट तंत्र में, लोकतंत्र के स्थापना की, कल्पना की जा सकती है | पूरे विश्व में, अप्रत्यक्ष प्रजातंत्र कायम है, और इसी धरती के एक छोटे से, हिस्से को जिसे की धरती का स्वर्ग कहा जाता है, ‘ स्विट्जरर्लैंड ‘, वहां प्रत्यक्ष प्रजातंत्र बहाल है | जिसका परिणाम पूरा विश्व देख रहा है | स्विट्जरर्लैंड, जो की काले धन का बड़ा मंडी है, और वहां प्रत्यक्ष प्रजातंत्र बहाल है | अगर पूरे विश्व की सत्ता सञ्चालन की व्यवस्था, उसी काले धन के काले समूह के दृारा नहीं होता, तो पूरे विश्व के काले धन का मालिक स्विट्जरर्लैंड नहीं होता | अगर पूरा विश्व प्रत्यक्ष प्रजातंत्र के व्यवस्था को अपना ले, तो काले धन का यह खेल हमेशा, हमेशा के लिए समाप्त हो जायेगा | जिसका परिणाम यह होगा की पूरा विश्व एक मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में, उभर कर सामने आएगा | और विश्व से, हमेशा, हमेशा के लिए अर्थ-विपन्नता समाप्त हो जाएगी | क्योंकि पूरे विश्व में, जो आज अराजकता फैली हुई है, वह अर्थ के लिए ही है | क्योंकि पैसे का निर्माण मनुष्य ने अपने आप को सामाजिक व्यवस्था में, कायम करने के लिए किया था, लेकिन कुछ लोगो के सत्ता लोलुपता के कारण, पैसा खुदा बन बैठा | और मुट्ठी भर लोग खुदा की श्रेणी में, काबिज़ हो गए | अगर मुट्ठी भर लोगो के हाथो से, इस विश्व को बचाना है, तो प्रत्यक्ष प्रजातंत्र एक मात्र इस समस्या का समाधान है | साहस का दूसरा रूप आजादी है, इसकी सीख हमे वियतनाम से, लेनी चाहिए, जो की अमेरिका जैसे सुपर पावर से, बरसो लड़ता रहा और वह आज भी आजाद है | इसलिए अगर कोई भी पार्टी हमे आजादी के नाम पर भयभीत करती है, तो उसे वियतनाम जैसे छोटे से, मुल्क से, सीख लेनी चाहिए | आजादी इन्सान का जन्मसिद्ध अधिकार होता है, आजादी किसी की कोई छीन नहीं सकता | हर मनुष्य को पूरी आजादी मिलनी चाहिए, जो की प्रत्यक्ष प्रजातंत्र के दृारा ही संभव है | आज पूरा विश्व राजनीतिक भ्रष्टाचार से, अवगत है और सही राह किसी को दिखाई नहीं देता | क्योंकि प्रत्यक्ष प्रजातंत्र ही इस समस्या का एक मात्र हल है, जिसे यह सत्ताशाह लागू नहीं करना चाहते | और लोगो को गलत राह पे, चलने को मजबूर करते हैं | अगर कोई आवाज इन सत्तासाहों के खिलाफ उठती है, तो उसे वह हमेशा, हमेशा के लिए मिटा देतें हैं | आज का विश्व शिक्षित है, और उसे यह समझना होगा, की पार्टीतंत्र के दृारा सही लोकतंत्र की स्थापना नहीं की जा सकती | सही लोकतंत्र की स्थापना प्रत्यक्ष प्रजातंत्र के माध्यम से, ही संभव है | अगर विश्व आज के युग में, नहीं जगा तो, यह मुट्ठी भर सत्ताशाहों अपनी सत्तालोलुपता के कारण, इस विश्व का सर्वनाश कर देंगे | और माया सभ्यता कभी भी, मानव सभ्यता में, परिवर्तित नहीं हो पायेगा |

 

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