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मनुष्य को उत्पन्न हुए इस धरती पर 40 लाख वर्ष हो चुके हैं | अब सवाल यह उठता है की, पहले धर्म की उत्पत्ति हुई, या मानव की ? तो इसका सीधा सा और सरल जवाब है ‘ मनुष्य ‘ | धर्म की स्थापना मनुष्य के दृारा समय, समय पर अपनी सुविधा के अनुसार की गई | जब की सबसे बड़ा सच यह है, की मनुष्य के आने और जाने का रास्ता एक ही है, यह धरती एक है , सूर्य एक है, वायुमंडल एक है | जबकि भौगोलिक कारणवश, मनुष्य की अलग अलग भाषाएँ, अलग अलग रंग, अलग अलग खान पान, अलग अलग वेश-भूषाएँ है | कालांतर से, धर्म, सत्ता पक्ष का एक धारदार हथियार बना रहा है | सबसे अधिक रक्त पात, धर्म के नाम पर विश्व भर में, होता रहा है | जिससे की पूरा विश्व आज वाकिफ है | मानव शिशु जब जन्म लेता है, तो वह परमात्मा का रूप होता है, उसे समाज अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार धर्म से, जोड़ देता है | जब की शिशु जब जन्म लेता है, तो उसे यह नहीं पता होता है, की वह किस धर्म का है | समाज उसे जिस धर्म के बारे में, बताता है, वह उसे ही अपना धर्म मान लेता है | एक सम्पूर्ण मानव बनने के लिए, अगर हम सारे धर्मो को एक साथ जोड़ कर देखे, तो मानव धर्म सबसे बड़ा धर्म होता है, क्योंकि धर्म की स्थापना मनुष्य को समाज से, जोड़ने, और सामाजिक व्यवस्था कायम करने के लिए हुई है | बेशक आप जिस धर्म को भी मानते हो, उसमे पूर्ण आस्था रखे, पर मानव और मानवता को पहला स्थान दे | पांच तत्वों से, इस पृथ्वी की रचना हुई है, और इन्ही पांच तत्वों से, मनुष्य का भी निर्माण हुआ है | सभी धर्मो को अगर हम आपस में, जोड़ कर देखे, तो एक सम्पूर्ण मानव और मानवता का निर्माण होता है | उदाहरण स्वरुप : बाइबल, यह बतलाता है की ” पृथ्वी सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का केंद्र है, और मानव ब्रह्माण्ड विजय के लिए ही उत्पन्न हुआ है, मानव इस ब्रह्माण्ड का राजा है, और उसकी उत्पति इस ब्रह्माण्ड पर शासन करने के लिए हुई है ” | कुरान शरीफ, यह सिखलाता है की ” मनुष्य का ईमान मुसल्लम होना चाहिए, अर्थात् मनुष्य को अल्लाह, ईश्वर, गौड में, जो की एक ही है, सम्पूर्ण विश्वास होना चाहिए | बिना सम्पूर्ण विश्वास के कुछ भी नहीं पा सकते, और पूर्ण विश्वास से, सब कुछ पाया जा सकता है” | बौध त्रिपिटक समझाता है ” जीवन में, संतुलन का कितना महत्व है | हमे अपने जीवन में, समता को अपनाना चाहिए | धैर्य और संतुलन से, मानव के प्रत्येक दुखो का नाश हो सकता है ” | भागवतगीता यह कहती है की “ईश्वर मानव के अंदर ही समाहित है, अर्थात् मनुष्य ही सच्चे अर्थो में, ईश्वर है | मानव जीवन में, कर्म का स्थान सर्वोपरि है | क्योंकि जैसा कर्म करते हैं वैसा ही फल पाते है, यानि की कर्म महान है ” | प्रत्येक मानव अपने अपने कर्म को पहचाने | इस तरह अगर हम सारे धर्मो को भी आपस में, जोड़ कर देखते हैं, तो मानव धर्म सर्वोपरि धर्म बनता है | मानव धर्म कहता है की चलो यारो किसी मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर में, जाने से, अच्छा है, किसी रोते हुए बच्चे को हँसाए | सही अर्थो में, बच्चा परमात्मा का रूप होता है | हर मानव बाला अवस्था से ही युवा और प्रौढ़ा अवस्था में जीवन का सफ़र तय करता है | जितना रूपया हम धर्म के नाम पर धार्मिक स्थल के उपर खर्च कर देते है, उन्ही रुपयों से अगर हम अपने आसपास के किसी गरीब, और असहाय मजबूर इन्सान की मदद कर के देखे, तो हम खुद में, खुदा का अस्तित्व महसूस करेंगे | इसलिए मानव धर्म सर्वोपरी है | आज पूरा विश्व वाकिफ है भारत, पाकिस्तान, और बंगलादेश की समस्याओं से, | 20 करोड़ मुसलमान हिंदुस्तान में, और लगभग 20 करोड़ मुसलमान पाकिस्तान और बंगलादेश में, रहतें हैं, और रोज एक दूसरे से, लड़ते हैं | जब की इसके राजनीतिक नेता गण अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए रोज एक दूसरे को लड़वाते हैं, और वह खुद आपस में, सुरक्षित रहते हैं | जरा गौर से, सोचे की यह नेता गण आपस में, सुरक्षित रह सकतें हैं, तो क्या आम लोगो का हक़ नहीं बनता है, आपस में, सुरक्षित रहने का | जब की कालांतर में, भारत, पाकिस्तान, बंगलादेश एक ही मुल्क हुआ करता था | जिसे मुट्ठी भर राजनेताओं ने अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए टुकडो में, बाँट दिया | अगर आज ये तीनो मुल्क एक हो, जाय तो विकास की सबसे ऊँची शिखर पर अपना परचम लहरा सकता है | उदाहरण स्वरुप : पूर्वी और पश्चमी जर्मनी का एकीकरण सामने है | एकता सबसे बड़ी ताकत है, अगर पूरा विश्व एक हो जाय, तो इस ब्रह्माण्ड पर विजय पाना बहुत ही आसान है | एक दशक काफी है, ब्रह्माण्ड विजेता बनने में |

 

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